मोतिहारी। पत्रकार संगठन अखंड पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन ने पत्रकार मनीष के परिवार को 25 लाख की मुआवजा राशि व उनके हत्यारों को स्पीडी ट्रायल द्वारा सजा दिलाने की मांग की है। अपवा के एक शिष्टमंडल ने शुक्रवार को पूर्वी चंपारण के डीएम को ज्ञापन दे यह मांग की है। एसोशिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में 5 सदस्यीय शिष्टमंडल ने पत्रकार स्वर्गीय मनीष कुमार सिंह हत्या कांड की जांच के संबंध में जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक को ज्ञापन दिया। बता दें कि बीते 12 अगस्त को एक टीवी चैनल के पत्रकार मनीष कुमार सिंह का शव बरामद किया गया था, जिनकी नृशंस हत्या कर दी गई थी।
डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में अखण्ड पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार पाण्डेय एवं प्रदेश सचिव शिवकुमार यति ने बिहार सरकार से स्पीडी ट्रायल कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने एवं परिजन को 2500000 रुपये की आर्थिक मदद की मांग की है। वहीं जिलाधिकारी ने ज्ञापन को यथाशीघ्र सरकार के पास भेजने का आश्वासन दिया है।
इस मौके पर पत्रकार रवि कुमार गुप्ता, प्रमोद कुमार शर्मा, एसोसिएशन के प्रमण्डलीय अध्यक्ष जियालाल प्रसाद यादव, राम इकबाल यादव,संतोष तिवारी, डॉ राजीव रंजन सहित अन्य पत्रकार भी मौजूद थे।
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क्या थी घटना
बीते 12 अगस्त को राज्य के पूर्वी चम्पारण में तीन दिनों से अपहृत पत्रकार मनीष कुमार सिंह का क्षत विक्षत शव तालाब में तैरता शव बरामद किया गया था। बताया गया कि पत्रकार मनीष कुमार सिंह अपने घर से दावत खाने के लिये निकले थे, जिसके बाद से वे गायब थे। मनीष एक टीवी चैनल के स्थानीय रिपोर्टर थे। साथ ही उनके पिता संजय कुमार सिंह अरेराज दर्शन नामक एक स्थानीय समाचार पत्र के संस्थापक संपादक हैं। मृतक पत्रकार मनीष सिंह के पिता आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में भी काम किया करते हैं। बताया गया था कि कई मामलों को उजागर करने के कारण उन्हें हमेशा धमकी मिलती रहती थी। साथ ही उनका पट्टीदारों के साथ जमीन का विवाद भी चल रहा था। परिजनों के अनुसार, पहाड़पुर थाना क्षेत्र के मनीष सिंह तीन दिन पहले हरसिद्धि थाना क्षेत्र के मठ लोहियार गांव में किसी पार्टी में शामिल होने के लिये घर से निकले थे।
उनके गायब होने के बाद उनकी बाइक मठ लोहियार गांव से संदिग्ध स्थिति में लावारिस बरामद की गई थी। इसके बाद पिता संजय कुमार सिंह ने अनहोनी की आशंका जताते हुए हरसिद्धि थाना में प्रथमिकी दर्ज कराइ थी। उनके द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में खुद को पत्रकार बताने वाले दो लोगों सहित कुल 12 लोगों को नामजद किया गया था।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा जांच शुरू की गई थी। इस क्रम में मनीष के गायब होने के अगले दिन पुलिस द्वारा दो पत्रकारो को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।