नहीं रहे ‘ट्रेजडी किंग’ दिलीप कुमार,यह ख्वाहिश रह गई अधूरी

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सेंट्रल डेस्क।बॉलीवुड पर कई दशकों तक राज करने वाले हिंदी सिनेमा जगत के ‘ट्रेजडी किंग’ दिलीप कुमार नहीं रहे.दिलीप कुमार का आज बुधवार की सुबह 7.30 बजे निधन हो गया.उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में आखिरी सांस ली.वो पहले एक्टर हैं जिन्होंने फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीता. उन्हें फ़िल्म ‘दाग’ के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया था.इसके बाद लगातार सात बार ये अवॉर्ड उन्होंने अपने नाम किया.बताया गया है कि आज शाम 5 बजे जुहु स्थित एक कब्रिस्तान में उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा.

दिलीप कुमार ट्रेजडी किंग के साथ ऑलराउंडर एक्टर भी कहे जाते थे.25 साल की उम्र में वे देश के नंबर वन एक्टर के रूप में स्थापित हो गए थे. राजकपूर और देवानंद की बॉलीवुड में इंट्री के बाद ‘दिलीप-राज-देव’ की फेमस त्रिमूर्ति ने लोगों के दिलों पर लंबे समय तक राज किया.

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दिलीप कुमार का जन्म पेशावर में 11 दिसंबर 1922 को हुआ. उनके पिता का नाम लाला गुलाम सरवर खान और मां का नाम आयशा बेगम था. उनके कुल 12 भाई-बहन हैं. उनके पिता फल बेचते थे. युसूफ खान ने देवलाली में स्कूलिंग की. वो राज कपूर के साथ बड़े हुए जो उनके पड़ोसी भी थे. बाद में दोनों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई.

आज से आठ दशक पहले पिता से झगड़ा होने के बाद युसूफ खान ने घर छोड़ दिया और पुणे चले गए. एक पारसी कैफे मालिक की मदद से उनकी मुलाकात एक कैंटीन कॉनट्रैक्टर से हुई. फिर अच्छी अंग्रेजी बोलने की वजह से पहला काम मिला. उन्होंने आर्मी क्लब में सैंडविच का स्टॉल लगाया और जब कॉनट्रैक्ट खत्म हुआ तो वो 5000 कमा चुके थे. इसके बाद वो बॉम्बे अपने घर वापस आ गए.

उधर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिलीप कुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा- “उनका जाना सांस्कृतिक दुनिया के लिए बड़ी क्षति है.” दिलीप कुमार के निधन पर राहुल गांधी ने जताया शोक जाहिर करते हुए कहा- “भारतीय सिनेमा में उनका योगदान कई पीढ़ियां याद रखेंगी.”

ट्रेजडी किंग की वह ख्वाहिश जो रह गई अधूरी

दिलीप कुमार पुश्तैनी हवेली को म्यूजियम बनते देखना चाहते थे. दिलीप कुमार की पुश्तैनी हवेली को 2014 में और राज कपूर की हवेली को 2018 में पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था.दोनों ही हवेलियां पेशावर शहर के रिहायशी इलाके किस्सा ख्वानी बाजार में हैं.पुश्तैनी हवेलियों पर औपचारिक संरक्षण की प्रक्रिया चल रही है.

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