Bijanaur News: (यूपी डेस्क)। उत्तरप्रदेश के बिजनौर (Bijnaur) में एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया था। 1.16 करोड़ की लागत से नहर की पटरी पर साढ़े 7 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन करते समय विधायक सूची चौधरी (MLA Suchi Chaudhary) ने सड़क पर नारियल पटका तो नारियल टूटने की जगह सड़क टूट गई। यह देख विधायक आग बबूला हो गईं और विभाग पर घटिया सामग्री लगाने और घोटाले का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गईं।
जेई और एई होंगे सस्पेंड
वहीं, नारियल फोड़ने के दौरान सड़क टूट जाने (Road damaged) की घटना को बेहद गंभीर मानते हुए प्रदेश के जल शक्ति मंत्री डा. महेंन्द्र सिंह ने सड़क को नए सिरे से बनाने के साथ ही संबंधित जेई शिवानी गुप्ता और एई को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अधिशासी अभियंता विकास अग्रवाल से भी स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला गुरुवार को तब सुर्खियों में आया जब नवनिर्मित सड़क का लोकार्पण किया जाना था, वह शुभारंभ के ठीक पूर्व विधायक द्वारा नारियल फोड़े जाने से ही चटक गई जबकि नारियल नहीं फूटा। गुरुवार को हुई इस घटना के बाद एक ओर संबंधित अधिकारी इसे अपूर्ण सड़क बताकर पर्दा डालने में जुटे रहे।
गांव खेड़ा अजीजपुरा के नहर फाल से कस्बा झालू तक सिंचाई खंड बिजनौर की ओर से 116.38 लाख रुपये की लागत से लगभग सात किलोमीटर सड़क का निर्माण एक माह पूर्व शुरू हुआ है। लगभग 700 मीटर सड़क बन चुकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के आग्रह पर गुरुवार शाम सदर भाजपा विधायक सुचि चौधरी और उनके पति ऐश्वर्य मौसम चौधरी इस सड़क का शुभारंभ करने पहुंचे थे।
विधायक ने जैसे ही तोडऩे के लिए नारियल पटका तो, नारियल तो नहीं फूटा लेकिन नवनिर्मित सड़क जरूर धंस गई। इसपर लोगों ने जमकर हंगामा किया। इसके बाद सदर विधायक और अन्य भाजपा नेता ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। पीडब्ल्यूडी के एई सुनील सागर के नेतृत्व में टीम ने नवनिर्मित सड़क से नमूना एकत्र किया।
वहीं भाजपा विधायक सुचि चौधरी ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर स्पष्ट कर दिया कि इस सड़क के निर्माण में जबरदस्त घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि एसआइटी गठित कर इसकी जांच होनी चाहिए, इस मामले से वह मुख्यमंत्री को भी अवगत कराएंगी।
अधिशासी अभियंता ने डीएम को भेजा अपना यह स्पष्टीकरण
एक नारियल से टूट जाने वाली इस नवनिर्मित सड़क को बनवाने का ठेका ओमप्रकाश कंस्ट्रक्शन को मिला है। कंपनी के मालिक ओमप्रकाश नजीबाबाद के रहने वाले हैं। कंपनी ने ई-टेंडर के तहत अपना आवेदन डाला था, जिसे सिंचाई विभाग के हरिद्वार खंड के अधीक्षण अभियंता विवेक सिंह ने पास किया था।
कुल 700 मीटर बनी इस सड़क के निर्माण के दौरान जेई शिवानी गुप्ता मौके पर थीं। इसके बाद भी सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई। हालांकि सिंचाई खंड बिजनौर के अधिशासी अभियंता विकास अग्रवाल ने डीएम को भेजे अपने स्पष्टीकरण में बताया कि सड़क अभी पूरी तरह तैयार नहीं थी।
सड़क सात किलोमीटर बनाई जानी है और अभी 700 मीटर की एक लेयर बनाई गई थी, दूसरी लेयर डाली जानी है। अभी न सड़क पास है और न ही इसका भुगतान हुआ है। घटिया सामग्री की जांच पीडब्ल्यूडी विभाग की टीम कर रही है। यह सड़क नारियल से नहीं टूटी है, बल्कि फावड़े से मैटेरियल को हटाया गया है। सड़क से नमूना लेकर जांच को भेजा गया है। एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, इस प्रकरण में कार्यशैली की आलोचना होने पर शनिवार को सिंचाई खंड हरिद्वार के अधीक्षण अभियंता विवेक सिंह यहां पहुंचे और मौके पर पड़ताल की। उन्होंने सड़क के नमूने की जांच रिपोर्ट आने तक सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई : डीएम
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में है। मंडलायुक्त से टेक्निकल आडिट कमेटी द्वारा जांच कराने का आग्रह किया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।