University News : वीसी पर लगे आरोपों का सीएम नीतीश ने लिया संज्ञान, राजभवन को लिखी चिट्ठी

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University News: बिहार सरकार ने मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा कॉपियों की खरीद में हुए घोटाले के लगाये गये आरोप पर संज्ञान लिया है।कहा जा रहा है कि बिहार में विश्वविद्यालयों के अंदर लूट का खेल लगातार जारी है। ऐसे में अब बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) खुद इन मामलों की जांच की सिफारिश कर रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार पटना के मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय (Maulana Mazharul Haque Arabic & Persian University) के पूर्व वीसी और वर्तमान में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति एसपी सिंह के खिलाफ टेंडर घोटाला मामले में जांच की सिफारिश खुद सीएम नीतीश कुमार ने की है।

इस मामले को लेकर शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने बताया कि सीएम नीतीश ने राज्यपाल फागू चौहान को सिफारिश पत्र भेजा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीएम नीतीश भ्रष्टाचार मामले में कोई समझौता नहीं करते हैं। आरोपी वीसी एसपी सिंह के खिलाफ जांच होगी। सीएम ने शिक्षा विभाग को भी सजग रहने का निर्देश दिया है।

कुलपति पर क्या है आरोप

बता दें कि मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय के वीसी प्रो कुद्दुस के पत्र पर संज्ञान लेते हुए सीएम नीतीश ने एसपी सिंह (SP Singh) के खिलाफ जांच की सिफारिश की है। प्रो कुद्दुस ने अपने आरोप पत्र में एसपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बताया है कि पूर्व वीसी एसपी सिंह ने डबल रेट पर लखनऊ की एजेंसी को आंसर शीट छापने के टेंडर दिए थे।

वहीं, पटना की एक एजेंसी के जरिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में भी अनियमितता पायी गई। इसके अलावा भी उन्होंने कई मद में आर्थिक अनियमितता बरती है। शिक्षा मंत्री ने इन आरोपों को लेकर कहा कि आरोप सही है या गलत ये लोगों के बीच आनी चाहिए।

वीसी पर एलएन मिथिला यूनिवर्सिटी में भी गड़बड़ी का लग चुका है आरोप

बता दें कि एसपी सिंह पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में भी भ्रष्टाचार करने का  मामला सामने आया है। टेंडर में भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा कोई और नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के भाजपा नगर विधायक संजय सरावगी के लिखे एक पत्र से हुआ है। बीजेपी विधायक द्वारा बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अपर सचिव को जून महीने में एक पत्र लिखा गया था जो यूनिवर्सिटी में करप्शन के खेल को उजागर करता है।

पूरा मामला ललित नारायण मिथिला विवि के कुलपति द्वारा चहारदीवारी, केंद्रीय लाइब्रेरी भवन, गांधी सदन के सामने तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि इसके लिए 2 करोड़ 56 लाख रुपये के लिये टेंडर निकले जाने में करप्शन का खेल हुआ है। बताया जा रहा है कि निविदा निकलने के पहले से ही संवेदक के द्वारा काम भी शुरू करवा दिया गया था।

भाजपा नगर विधायक संजय सरावगी में अपने लिखित पत्र में ये कहा है कि 2 करोड़ 56 लाख के निविदा में घोर अनियमितता हुई है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का ये नियम है कि 15 लाख से अधिक के कार्य का टेंडर कम समय में नही निकाला जाय, बल्कि इसके लिये ई-टेंडर किये जाने का प्रावधान है लेकिन, विवि प्रशासन ने सरकार के इस नियम को तोड़ते हुये अपने करीबी संवेदक (ठेकेदार) को लाभ पहुंचाने को लेकर टेंडर प्रकाशित नहीं किया।

वहीं, मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुद्दूस ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा था कि जब विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह के जिम्मे था, तो सात रुपये की कॉपी सोलह रुपये में खरीदी गयी। सोलह रुपये की दर से एक लाख 60 हजार कॉपियों के ऑर्डर लखनऊ के एक फर्म को दिये गये।

प्रो. कुद्दूस का आरोप है कि जब वे कुलपति बने, तो उन पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अपने पत्र में उन्होंने एक व्यक्ति का नाम भी लिया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में की है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रो. कुद्दूस के पत्र पर संज्ञान लेते हुए उसे राजभवन भेजा है, ताकि प्रो. कुद्दूस द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच की जा सके।

इस बीच शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल का स्वागत किया है तथा कहा है कि चूंकि आरोप गंभीर प्रवृत्ति के हैं, इसलिए जांच होनी चाहिये।



उन पर आरोप मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.कुद्दूस ने लगाया है। आरोप के मुताबिक जब प्रो.सिंह मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति के अतिरिक्त प्रभार में थे, तो विश्वविद्यालय द्वारा सात रुपये की कॉपी कई गुणा अधिक मूल्य पर खरीदी गयी। एक लाख साठ हजार कॉपियों की आपूर्ति के आदेश दिये गये। भुगतान के लिए उन पर दबाव बनाया गया।