छपरा। सदर अस्पताल के एक किरानी को निगरानी विभाग की टीम ने घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार व्यक्ति छपरा सदर अस्पताल के ओपीडी स्थित उपाधीक्षक कार्यालय का किरानी राकेश कुमार सिंह बताया गया है. निगरानी विभाग की टीम ने उसे ₹10000 घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. इस मामले में निगरानी विभाग के डीएसपी अरुण पासवान ने बताया कि छपरा सदर अस्पताल के चिकित्सक पटना निवासी डॉक्टर संजीव रंजन की शिकायत पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के द्वारा जाल बिछाया गया और उक्त किरानी राकेश कुमार को डॉक्टर संजीव रंजन से ₹10 हजार घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है.
उन्होंने बताया कि इसके बाद निगरानी विभाग की टीम ने अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय के किरानी कक्ष के अन्य कागजातों की जांच की और जांचोपरांत उक्त किरानी को गिरफ्तार कर पटना ले गई. छापेमारी की में डीएसपी श्री पासवान के साथ पुलिस उपाधीक्षक परीक्ष्यमान अरुणोदय पांडेय, पुलिस उपाधीक्षक परीक्ष्यमान सुजीत कुमार सागर,.पुलिस निरीक्षक मिथिलेश कुमार जायसवाल, पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र राम, पुलिस निरीक्षक श्याम बाबू प्रसाद, पुलिस अवर निरीक्षक संजय कुमार चतुर्वेदी, पुलिस अवर निरीक्षक देवीलाल श्रीवास्तव, पुलिस अवर निरीक्षक आशीष कुमार एवं सिपाही मोहन कुमार पांडे, विनोद कुमार सिंह मौजूद थे.
निगरानी विभाग के शिकंजे में घूसखोर किरानी(बीच में गुलाबी शर्ट में)
डॉ संजीव रंजन ने विजिलेंस से की थी शिकायत
छपरा सदर अस्पताल से प्रतिनियुक्ति पर बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति पटना में पदस्थापित डॉक्टर संजीव रंजन के द्वारा पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को एक शिकायत की गई थी. जिसमें उनके द्वारा बताया गया था कि 20 सितंबर 2018 को उनका पदस्थापन बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना कर दिया गया. जिसके बाद से उनका परिवहन भत्ता, मकान भत्ता, एसीपी सहित अन्य मद के एरियर करीब 03 लाख रुपये बकाया है. उस रकम की निकासी को लेकर वह लगातार छपरा सदर अस्पताल दौड़ रहे थे.
जबकि उपाधीक्षक कार्यालय के किरानी के द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही थी. जिसके बाद बातचीत के क्रम में उनसे उस रकम की निकासी को लेकर घूस की मांग की गई. उस रकम की निकासी के लिए डॉ संजीव रंजन से ₹30000 की मांग की गई तो वह सोच में पड़ गए. इस दौरान उनके द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना को शिकायत की गई. इसी बीच ₹3 लाख की निकासी को लेकर मामला ₹10 हजार में तय हुआ. जिसका व्वायस रिकार्डिंग भी साक्ष्य के रूप में अन्वेषण ब्यूरो को हस्तगत किया गया. जिसके बाद निगरानी विभाग के द्वारा टीम बनाकर उक्त किरानी को चिकित्सा से ₹10000 का घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है.