पटना। लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के बाद चिराग पासवान के चाचा और एलजेपी सांसद पशुपति पारस से पहली बार मीडिया के सामने आए हैं। पशुपति पारस ने कहा है कि चिराग पासवान ने विधानसभा चुनाव में जिस तरह का फैसला किया उसको लेकर पार्टी में लगातार विरोध हो रहा था। पार्टी के सांसदों की राय थी कि चिराग के गलत फैसले के कारण न केवल एलजेपी बल्कि एनडीए को भी बिहार में नुकसान पहुंचा।
उन्होंने कहा कि ऐसे में अब पार्टी ने तय किया है कि संसदीय दल के नेता लोकसभा में वह होंगे और पार्टी की कमान भी उनके पास होगी।एलजेपी में टूट की खबर की अब आधिकारिक तौर पर पारस ने पुष्टि कर दी है। पारस ने कहा है कि चिराग पासवान उनके भतीजे हैं और पार्टी के नेता भी हैं। ऐसे में वे चाहें तो एलजेपी में रह सकते हैं, लेकिन एलजेपी का नेतृत्व अब चिराग की बजाय उनके हाथों में होगा।
बता दें कि लोक जनशक्ति पार्टी में घमासान मचा हुआ है। सियासी हलकों में इस घमासान को लेकर तरह-तरह के विश्लेषण किए जा रहे हैं। दिवंगत रामविलास पासवान की खड़ी की हुई पार्टी बीच मंझधार में खड़ी नाव की तरह डोल रही है। सिर्फ लोजपा ही नहीं, वरन बिहार की सियासत में भी एक तरह का तूफान मच गया है।
13 जून की रात लोक जनशक्ति पार्टी के छह में से पांच सांसदों ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है। सिर्फ रामविलास पासवान के पुत्र व फिलहाल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे चिराग पासवान ही अब पार्टी के इकलौते सांसद बच गए हैं। वैसे लड़ाई इस बात की भी शुरू हो गई है कि लोजपा की बागडोर अब किसके हाथों में होगी।