पटना। देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर चल रही है और तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज फेफड़ों और छाती में गंभीर संक्रमण और न्यूमोनिया के शिकार हो रहे हैं। हालांकि गंभीर संक्रमण के शिकार इन मरीजों को ठीक करने या कोरोना संक्रमित मरीजों के गंभीर संक्रमण का शिकार होने से बचाने में चेस्ट फिजियोथेरेपी ने रामबाण का काम किया है।

कोरोना के मैनेजमेंट में फिजियोथेरेपी की भूमिका को लेकर ‘बिहारी खबर लाइव’ ने पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) में फिजियोथेरेपी विभाग में सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट एवं योग इंचार्ज डॉ रत्नेश चौधरी से खास बातचीत की। डॉ चौधरी ने चेस्ट फिजियोथेरेपी के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कोरोना के मैनेजमेंट में चेस्ट फिजियोथेरेपी रामबाण की तरह है। कोविड के नियंत्रण और मैनजमेंट में उन्होंने बड़ी संख्या में मरीजों की चेस्ट फिजियोथेरेपी से चिकित्सा कर लाभ पहुंचाया है। गंभीर रूप से संक्रमित हो चुके मरीजों के फेफड़ों और छाती को भी सही तरीके से विशेषज्ञ द्वारा अगर चेस्ट फिजियोथेरेपी की जाय तो काफी कम समय में संक्रमण को दूर किया जा सकता है। चेस्ट फिजियोथेरेपी करने से गंभीर श्रेणी के संक्रमितों का आईसीयू में रहने की अवधि कम हो जाती है, जिससे इलाज का खर्च कम हो जाता है। बीमारी ठीक हो जाने के बाद कम्प्लिकेशन कम होता है और मृत्यु दर भी कम हो जाता है।
डॉ चौधरी ने कहा कि यही नहीं, बल्कि अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से चेस्ट फिजियोथेरेपी करता है तो कोविड सहित कोई भी वायरस उसपर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल सकता। नियमित रूप से चेस्ट फिजियोथेरेपी करने वाले लोगों को यूं तो सीवियर संक्रमण की संभावना नगण्य होती है, लेकिन कभी अगर गंभीर संक्रमण भी हो जाय तब भी वह ठीक हो जाएगा।

कोविड के हालिया लहर में जो संक्रमित गंभीर रूप से बीमार हो जा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर को न्यूमोनिया का संक्रमण हो जा रहा है, जो चेस्ट के सिटी स्कैन से पता चल रहा है। कोविड से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों का सिटी स्कैन सिवियरिटी स्कोर 20/25 से 22/25 तक चला जा रहा है। डॉ चौधरी ने कहा कि अगर विशेषज्ञ द्वारा सही तरीके से चेस्ट फिजियोथेरेपी की जाय तो न्यूमोनिया होने की संभावना नहीं रहती। यही नहीं बल्कि चेस्ट फिजियोथेरेपी से कोविड पल्मोनरी फाइब्रोसिस भी ठीक हो जाता है।
डॉ चौधरी ने कहा कि बिना चेस्ट फिजियोथेरेपी के न्यूमोनिया पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता।
डॉ रत्नेश चौधरी ने बताया कि चेस्ट फिजियोथेरेपी कितने दिनों तक करना है, यह बीमारी और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ बीमारियों में केवल बीमारी ठीक होने तक इसकी जरूरत पड़ती है तो कुछ बीमारियों में एक महीना, कुछ बीमारियों में 3 महीना और कुछ बीमारियों में आजीवन चेस्ट फिजियोथेरेपी करनी पड़ सकती है। चेस्ट फिजियोथेरेपी में योग-व्यायाम के अलावा कुछ मशीनों का प्रयोग किया जाता है। इन मशीनों में स्पाइडोमीटर, पीकफ्लो मीटर, वाइब्रेटर, स्पाइरोमीटर, नेबुलाइजर आदि शामिल हैं। वहीं अस्पताल में मरीजों को ड्रेनेज, पोस्टल ड्रेनेज आदि भी कराया जाता है।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह भी बताई कि कोई भी सर्जरी करनी हो, उसके पहले मरीज की चेस्ट फिजियोथेरेपी अवश्य करानी चाहिए। इससे कम्प्लिकेशन होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। कैंसर से पीड़ित मरीजों को भी चेस्ट फिजियोथेरेपी अवश्य करानी चाहिए, इससे काफी लाभ होता है।
डॉ चौधरी ने बताया कि चेस्ट फिजियोथेरेपी अस्पतालों के ओपीडी, आईसीयू में भी कराई जा सकती है और स्वस्थ व्यक्ति भी अपना स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के लिए इसे नियमित रूप से कर सकता है। हालांकि इतनी महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति होते हुए भी देश में, खासकर बिहार जैसे राज्यों में चेस्ट फिजियोथेरेपी के प्रति गंभीरता का अभाव है। वैसे तो कुछ सरकारी एवं निजी अस्पतालों में चेस्ट फिजियोथेरेपिस्ट बहाल किए गए हैं, पर जरूरत है कि हर उस अस्पताल, जिसमें आईसीयू की व्यवस्था हो, उसमें विशेषज्ञ चेस्ट फिजियोथेरेपिस्ट की बहाली की जाय। इसके अतिरिक्त सरकारी व निजी अस्पतालों के ओपीडी में भी चेस्ट फिजियोथेरेपिस्ट होने चाहिए। इससे मरीजों को काफी लाभ होगा।