Bihar News : (पटना)। बिहार के एक बड़े सियासी घटनाक्रम में शरद यादव की अगुवाई वाली लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का राज्य के मुख्य विपक्षी दल आरजेडी में विलय हो गया. बिहार की राजनीति में 20 मार्च की तारीख यह बड़ा सियासी घटनाक्रम लेकर आई. सूबे की सियासत में बड़ा कद रखने वाले शरद यादव ने अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) का लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में विलय कर दिया है. एलजेडी के आरजेडी में विलय के बाद बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
वहीं इस मौके पर शरद यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार के भविष्य हैं. उन्होंने कहा कि देश में मजबूत विपक्ष स्थापित करना समय की मांग है. मैं इस दिशा में न केवल बिखरी हुई तत्कालीन जनता दल बल्कि अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट करने के लिए लंबे समय से काम कर रहा हूं. इसी वजह से अपनी पार्टी एलजेडी का राजद में विलय करने का फैसला किया. अब मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी. शरद याव का कहना है कि पहले एकता जरूरी है. बीजेपी से लड़ाई में विपक्षी खेमे का नेतृत्व कौन करेगा, ये बाद का सवाल है.
उन्होंने कहा कि वो जनता दल के अपने पुराने साथियों को एकजुट करने में लंबे अर्से से लगे थे. एक मजबूत विपक्ष का होना आज वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है. अगर समय रहते ऐसा नहीं हो पाता तो ये बड़ी हार होगी. हमें अपने अहम भूलकर बीजेपी के खिलाफ मजबूत फ्रंट बनाना होगा. तभी हम 2024 में उसे शिकस्त देने में कामयाब हो पाएंगे.
तेजस्वी यादव ने कहा है कि शरद यादव की ओर से एलजेडी के आरजेडी में विलय को लेकर लिया गया फैसला जनता की डिमांड है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक तेजस्वी ने इसे अन्य विपक्षी दलों के लिए भी संदेश बताया. उन्होंने कहा कि आरजेडी में एलजेडी का विलय अन्य विपक्षी दलों के लिए भी एक संदेश है कि यह सही समय है.
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने तेजस्वी यादव ने कहा कि हमें 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही एकजुट होना चाहिए था. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि कभी नहीं से देर भी अच्छी. गौरतलब है कि शरद यादव ने रविवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में एलजेडी का आरजेडी में औपचारिक रूप से विलय कर दिया.
शरद यादव ने 2018 में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) छोड़कर लोकतांत्रिक जनता दल नाम से अपनी पार्टी बना ली थी. मधेपुरा संसदीय सीट से सात बार सांसद रहे शरद ने अपनी पार्टी के आरजेडी में विलय का ऐलान पहले ही कर दिया था. शरद यादव ने अपने इस कदम को जनता दल को एजकजुट करने की दिशा में बढ़ाया गया कदम बताया था.