सेन्ट्रल डेस्क। तीन नए कृषि कानूनों के विरुद्ध आंदोलनरत किसान संगठनों ने 27 सितंबर को भारत बंद का एलान किया है। किसानों द्वारा बुलाए गए इस बंद को धीरे-धीरे देश के कई प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन मिलता जा रहा है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के ‘महागठबंधन’ ने बंद को समर्थन देने की घोषणा कर दी है तो आंध्रप्रदेश में सत्तारूढ़ जगह मोहन रेड्डी की सरकार ने भी किसानों के बंद को समर्थन दे दिया है। उधर किसान नेता राकेश टिकैत आज रविवार को किसानों की एक बड़ी सभा को संबोधित करने वाले हैं।
बिहार में राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन की बैठक शनिवार को नेता प्रतिपक्ष राजद के तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया है कि किसानों द्वारा 27 सितंबर को आहूत भारत बंद को महागठबंधन समर्थन देगा।
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शनिवार को तेजस्वी यादव के आवास पर आयोजित महागठबंधन दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी तेजस्वी यादव ने दी है। उन्होंने कहा, “बैठक में NDA सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में सर्वसम्मिति से 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत भारत बंद में बढ़-चढ़कर भाग लेने एवं समर्थन देने का निर्णय लिया गया। हम मज़बूती से अन्नदाताओं के साथ है।”
उधर, आंध्र प्रदेश सरकार भी संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 27 सितंबर को बुलाए गए ‘भारत बंद’ को पूर्ण समर्थन देगी। यह घोषणा राज्य के सूचना एवं परिवहन मंत्री पर्नी वेंकटरमैया (नानी) ने शनिवार को की। इसके अलावा आंध्र सरकार ने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों का भी समर्थन करने की बात कही है।
सूचना एवं परिवहन मंत्री पर्नी वेंकटरमैया ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, “वाईएसआर कांग्रेस सहित आंध्र प्रदेश सरकार किसानों और इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों की चिंताओं का समर्थन करेगी।”
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वेंकटरमैया ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 26 सितंबर की मध्यरात्रि से 27 सितंबर की दोपहर तक राज्य भर में आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों को रोकने का फैसला किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के पूरी तरह खिलाफ हैं। मंत्री ने बंद के दौरान लोगों से शांतिपूर्ण तरीक से प्रदर्शन करने की अपील की। गौरतलब है कि वाम दलों, कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी ने पहले ही भारत बंद को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। बता दें कि किसानों की मांग है कि किसी तरह तीनों कृषि कानून वापस हो जाएं।