ललन सिंह के जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही ‘नालंदा’ ने लगा ली हैट्रिक

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पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के चुने जाने के साथ ही नालंदा जिला ने हैट्रिक लगा दिया है। शनिवार को नई दिल्ली में जदयू की पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी और ज्यादातर राज्यों के अध्यक्ष की मौजूदगी में ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की गई। हालांकि पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपेंद्र कुशवाहा का नाम सबसे आगे चल रहा था।

बता दें कि निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह नालंदा जिले के ही थे। उनके पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वे भी नालंदा जिला के रहने वाले थे। इस प्रकार जदयू के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है और अब जिले के तीन नेता लगातार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर चुके हैं।यह तो सभी जानते हैं कि राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मुंगेर के सांसद हैं, लेकिन वे नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड के गिलानी चक के रहने वाले हैं।

बता दें कि शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसकी घोषणा की गई। इससे पहले आरसीपी सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंपा। ललन सिंह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं और बीच की कुछ अवधि को छोड़ दें तो वे कई दशकों से लगातार नीतीश कुमार के साथ रहे हैं। वे जदयू के संस्थापकों में से एक हैं और पार्टी के ट्रबल शूटर कहे जाते हैं। राजनीतिक हलकों में कई मौकों पर उन्हें ‘होम्योपैथी ट्रीटमेंट’ का एक्सपर्ट भी कहा जाता रहा है।

नई दिल्ली में जदयू की पूर्व निर्धारित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी और ज्यादातर राज्यों के अध्यक्ष की मौजूदगी में ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की गई। हालांकि पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपेंद्र कुशवाहा का नाम सबसे आगे चल रहा था। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पिछले दिनों अपनी पार्टी का जदयू में विलय कर दिया था। जिस दिन वे जदयू में शामिल हुए थे, उसी दिन उन्हें पार्टी संसदीय बोर्ड के चेयरमैन पद की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से ही उनका नाम पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चर्चा में आ गया था। पिछले एक सप्ताह में परिस्थितियां बदलीं और ललन सिंह का नाम सामने आ गया और आज अंततः ललन सिंह की ताजपोशी कर दी गई।

ललन सिंह उन लोगों में शुमार हैं जिनके साथ मिलकर नीतीश कुमार ने जदयू की नींव डाली है। नीतीश कुमार ने जब अलग पार्टी बनाने का निर्णय लिया था तो ललन सिंह नीतीश कुमार के साथ थे। उस वक्त शरद यादव के विरोध को भी ललन सिंह ने दरकिनार कर नीतीश का साथ दिया था। बीच के कुछ दिनों को छोड़ दिया जाय तो तभी से वे नीतीश कुमार के साथ जुड़े हुए हैं। वैसे बीच में कुछ समय के लिए दोनों के बीच मनमुटाव हुआ था लेकिन यह मनमुटाव थोड़े दिनों का रहा और फिर से दोनों साथ हो गए थे। ललन सिंह को पार्टी का ट्रबल शूटर या संकटमोचक कहा जाता है। उन्होंने पार्टी और नीतीश कुमार के लिए कई मौकों पर अपनी संकट मोचक की भूमिका का बखूबी निर्वहन किया है।

हाल में लोक जनशक्ति पार्टी में जो अंतर्कलह और घमासान मचा है, उसे लेकर भी सियासी गलियारों में ऐसा कहा जाता है कि लोजपा के पशुपति कुमार से ललन सिंह ने ही चर्चा की शुरुआत की थी। जिसके बाद अंततः पार्टी में बगावत के बीज फूट गए थे।