DMCH के कोरोना नोडल ऑफिसर डॉ अहसन हमीदी बोले-संभावित तीसरे लहर से बचाव के लिए ग्रामीण परिवेश में अधिक जागरूकता ज़रूरी

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दरभंगा। देश में कोरोना की तीसरी लहर संभावित है। इसमें आशंका यह भी जाहिर की जा रही है कि इससे बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस स्थिति में कोरोना रोधी टीका ही इसके बचाव का एकमात्र उपाय है। इसके पीछे वजह यह है कि जब बड़ी उम्र के लोग सुरक्षित होंगे, तो बच्चे खुद-ब-खुद सुरक्षित हो जाएंगे। लेकिन, टीकाकरण में समस्या यह आ रही है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे लगवाने से अब भी बच रहे हैं। डीएमसीएच के कोरोना नोडल ऑफिसर डॉ अहसन हमीदी बताते हैं मीडिया के माध्यम से यह बात सामने आती रहती है कि गांवों के लोग अब भी टीका लगवाने से बच रहे हैं।

उन्होंने कहा “गांव में संसाधन सीमित हैं इसलिए लोगों को जागरूक करना ज़रूरी है। प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयास के परिणामस्वरूप टीकाकरण में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है। टीका केन्द्र पर पहले की अपेक्षा अधिक संख्या में लोग वैक्सीन लेने पहुंच रहे हैं। उधर गांवों में संक्रमण रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 मई को गाइडलाइन जारी किया है। ऐसी स्थिति में, तीसरी लहर के दौरान ग्रामीण परिवेश में अधिक सतर्कता के साथ साथ टीकाकरण नितांत ज़रूरी है।”

गाँव में कोरोना से रक्षा के लिए टीकाकरण को ले करें प्रेरित :

डॉ हमीदी कहते हैं कि गांवों के कई हिस्सों में अभी तक 4 जी नेटवर्क की सुविधा नहीं है। ऐसे में कोरोना के संभावित तीसरे चक्र से बचाव के लिए सभी ग्राम प्रधान पंचायत भवन में कुछ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था पहले से करके रखें। साथ ही, इलाज की जो व्यवस्था शहरों में चल रही है, उसे गांवों तक पहुंचाया जाए। कोरोना से बचाव का जो प्रचार हम फोन के कॉलर ट्यून में सुन रहे हैं, वो गांवों में वर्ड ऑफ माउथ (मुहांमुही) की तरह रहे। लोग एक-दूसरे को बचाव का उपाय बताएं। इससे पूर्व अधिक से अधिक लोगों को कोरोना से सुरक्षा के लिए टीकाकरण पर ज़ोर देना होगा। इसे लेकर लोगों को प्रेरित करना होगा।

बच्चों में रोग की गंभीरता बहुत कम है :

उन्होंने कहा कि बच्चों में जो इंफ़ेक्शन आया है, वह बड़ों से आया है। संक्रमण के ट्रांसमिशन की चेन में बच्चे सबसे नीचे हैं। अब अगर अस्पतालों में भर्ती होने की बात करें, तो 1-2 फीसदी बच्चे ही अस्पताल में भर्ती हुए हैं। बच्चों में रोग की गंभीरता बहुत कम है।

गांवों में टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट पर जोर :
डॉ हमीदी ने कहा कि शहरों की अपेक्षा गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं थोड़ी कम हैं। इसलिए गांव में टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट के आधार पर कार्य करना होगा। जिस गांव में संक्रमण बढ़ रहा है, वहां टेस्टिंग के कैम्प लगा कर रैंडम टेस्टिंग करनी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को अलग रखना चाहिए। संक्रमित लोगों को अलग रखने के लिए अगर घर में व्यवस्था न हो, तो पंचायत भवन या स्कूलों का उपयोग भी किया जाना चाहिए। गांव के अस्पतालों में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की किट उपलब्ध करवा कर हल्के लक्षण वाले मरीजों को तुरंत उपचार दिया जाए, तो वे जल्दी ठीक हो सकते हैं।

सदैव कोरोना प्रोटोकॉल का करें अनुपालन:
कोरोना से बचाव के लिए उचित व्यवहार के साथ ही विभागीय प्रोटोकॉल का अनुपालन करें। मास्क पहनें ने। हाथ को लगातार साबुन से साफ करें। बिना ज़रूरत के बाहर न निकलें । अतिआवश्यक होने की स्थिति में ही बाहर निकलें । भीड़ भाड़ में न जाएं । लाकडाउन छुटने के बावजूद सतर्कता ज़रूरी है। कोरोना का खतरा बरकरार है। हर हाल में कोरोना से बचाव के लिए टीका ज़रूर लें। किसी प्रकार की चिकित्सकीय मदद के लिए निकट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सम्पर्क करें।