Indian Economy: आजादी से अब तक लोगों की आय 24 गुना बढ़ी। आजादी के बाद 1950 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आकार के लिहाज से भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी था। आजादी के समय से लेकर देश की प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। देश में विगत 75 सालों में काफी बदलाव हुए। बाद के वर्षों में अन्य देशों के तेजी से आगे बढ़ने के कारण 1991 में यह 12वें स्थान पर पहुंच गया। बाद में विकास की रफ्तार बढ़ी तो 2014 में भारत की रैंकिंग सुधर कर 10वीं हो गई। पिछले साल यह पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना।
जब 1947 में आजाद हुआ तब देश हर चीज के लिए आयात पर निर्भर था। चाहे खाने-पीने की चीजें हों या रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली दूसरी वस्तुएं। लेकिन आज आठ दशक पूरे होने से चार कदम दूर वही देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की दहलीज पर खड़ा है। आईएमएफ के अनुसार 2027 में भारत की 5.15 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर होगी, जो अभी पांचवें स्थान पर है।
75 साल में 55 गुना बढ़ी जीडीपी
साल 1947 में आजादी के समय देश की जीडीपी महज 2.7 लाख करोड़ रुपये थी। यह दुनिया की कुल जीडीपी का 3 प्रतिशत से भी कम भाग था। लेकिन आज भारत की जीडीपी लगभग 150 लाख करोड़ रुपये है। पिछले 75 साल में जीडीपी का आकार 55 गुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। दुनियाभर की जीडीपी में भारत के हिस्से की बात करें तो यह 9 प्रतिशत है। आने वाले 2024 तक जीडीपी का हिस्सा 10 प्रतिशत के पार जा सकता है। 75 साल के इस सफर में 3 मौके ऐसे आए. जब अर्थव्यवस्था की ग्रोथ शून्य से नीचे रही है। ये साल थे पहली बार 1965, दूसरी बार 1979 और तीसरी बार 2020 में कोरोना महामारी के दौरान आई है। इससे साफ है कि इकोनॉमी की पटरी पर भारत की जीडीपी सरपट दौड़ रही है।
क्या रही प्रति व्यक्ति आय
किसी भी देश की आर्थिक खुशहाली का अंदाजा वहा की प्रति व्यक्ति आय (Per Capital Income) से लगाया जा सकता है. आजादी के बाद 1950-51 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 274 रुपये थी. जो कि आज बढ़कर करीब 1.5 लाख रुपये वार्षिक हो गई. भारत ने इस आंकड़े में काफी प्रगति की है.